तीर्थंन घाटी की यात्रा Part1

परिचय

कहानी कुछ यूं शुरू होती है की पिछले साल इन्हीं दिनों गर्मियों की छुट्टियाँ थीं और बच्चों की फरमाइश थी कि इस बार छुट्टियों में सिर्फ नानी के यहाँ नहीं जाएंगे कहीं और भी अलग से घुमाओ. अब अपन परेशान कि इनको कहाँ लेकर जाया जाये. पारा पहले ही 47-48 के बीच में घूम रहा है. पहाड़ों पर स्थित “पॉपुलर हिल स्टेशन्स” पर जमा भारी भीड़ और अव्यवस्था के बारे में पहले ही सोशल मीडिया में चर्चा चल रही है.

पाठकों की जानकारी के लिए बताता चलूँ कि मैं मूलतः लुधियाना से हूँ और पिछले लगभग 15 वर्षों से दिल्ली NCR में ही सपरिवार रहता हूँ. दोनों बच्चे यहीं पैदा हुए और यहीं के “महाननगरीय कल्चर” अनुसार पले-बढे हैं, पत्नी का नाम अल्का है और दोनों बच्चों के नाम विशेष (आठ साल) और गौरांश (छह साल) हैं और हम सब हमारी माता जी के साथ रहते हैं.

मेरी ससुराल भी लुधियाना में ही है और गर्मी कि छुट्टियों में बीवी-बच्चों को लुधियाना छोड़ कर आना और छुट्टियां ख़त्म होने पर वापिस लाना यही रूटीन बना हुआ था कुछ वर्षों से. अब चूंकि बच्चे बड़े हो रहे हैं सो इस बार बच्चों की लुधियाना के इतर कहीं और भी घूमने कि फरमाइश थी.

स बार भी यही शेड्यूल था. 15 मई को पत्नी और बच्चों को लुधियाना छोड़ दिया था और लगभग एक महीना और एक सप्ताह लुधियाना में बिताने के बाद समय आया बच्चों के वापिस आने का तो अपन लगे अपना दिमाग दौड़ाने कि बिना किसी भारी बजट और अधिक समय खपाये.कहाँ पर “सस्ता-सुन्दर-टिकाऊ” ट्रेवल किया जा सकता है

लुधियाना के आस पास के दो-तीन ऑप्शन दिमाग में आये जैसे कि भाखड़ा डैम, पोंग झील, धरमशाला-मेकलॉडगंज (जो कि हम पहले ही घूम चुके हैं) परन्तु कोई भी ऑप्शन स्वयं को भी “दिल से” जंच नहीं रहा था. सिर्फ बच्चों का मन रखने कि खातिर खाना-पूरी ही लग रही थी.

फिर एक बार को मन हुआ कि चलो लुधियाना से ग़ाज़ियाबाद के लिए अम्बाला-करनाल-पानीपत वाला रुट ना लेकर चंडीगढ़-पौंटा साहिब-देहरादून का रुट ले लिया जाये और वहां से ग़ाज़ियाबाद जाया जाये. लगभग 250 किलो मीटर फ़ालतू रास्ता पड़ेगा पर चलो रस्ते में कहीं पहाड़ कहीं जंगल कहीं गांव देहात देखने को मिल जायेंगे. मन हुआ तो रास्ते में एकाध रात कहीं किसी होटल में रुक जायेंगे. पर फिर भी मन से कुछ तसल्ली सी नहीं हो पा रही थी.

इसी बीच गुरुदेव Monica Ajit Singh और ट्रेवलकीट Neeraj Kumar की कुछ फेसबुक पोस्ट पढ़ीं तो पता चला कि ये लोग किसी “तीर्थन घाटी” में घूम रहे हैं. घूम क्या रहे हैं बस वहीँ पड़े हैं 15 -20 दिन से और फोटो पे फोटो अपलोड कर रहे हैं कभी बरसात की, कभी बहती हुई नदी की, कभी य्ये घने जंगलों की एकदम जबरदस्त फोटो. ऊपर से तापमान बता रहे हैं कि 12 डिग्री है. यहाँ अपन 45-46 डिग्री तापमान में सुबह ग़ाज़िआबाद से गुडगाँव और शाम को गुडगाँव से ग़ाज़िआबाद कुत्त-घसीटी कर रहे हैं, ट्रैफिक जाम झेल रहे हैं.

अब अपने दिमाग़ की बत्ती जगी 😃

क्रमशः

आपका अपना ….. पारुल सहगल साथी

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